केकई, राजा दशरथ और वनवास… नीतीश पर 'विश्वास' को तेजस्वी के सवाल ने किया बेदम

केकई, राजा दशरथ और वनवास... नीतीश पर 'विश्वास' को तेजस्वी के सवाल ने किया बेदम
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<p style="text-align: justify;">बिहार विधानसभा स्पीकर के खिलाफ सत्ताधारी एनडीए की तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान पक्ष में 125 वोट पड़े जबकि विपक्ष में सिर्फ 112 वोट पड़े. &nbsp;इसके बाद राष्ट्रीय जनता दल के नेता अवध बिहारी को बिहार विधानसभा अध्यक्ष पद से हटा दिया गया.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इधर, विश्वासमत प्रस्ताव के दौरान नीतीश सरकार के पक्ष में 129 वोट पड़े तो वहीं विपक्ष ने वॉकआउट किया. इन सबके बीच विपक्षी नेता तेजस्वी यादव जब विधानसभा में बोलने के लिए उठे तो उन्होंने सीधे-सीधे सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कठघरे में खड़ा करते हुए सम्मानजनक लहजे में ये साफ कर दिया कि मोदी को उनका भतीजा बिहार में रोकने का माद्दा रखते है.</p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने विधानसभा में बोलते हुए नीतीश कुमार पर कड़े शब्दों में ऐसा कोई बड़ा हमला नहीं बोला और कहीं न कहीं भविष्य के लिए जरूर उन्होंने एक स्पेस रखा. सबसे दिलचस्प उदाहरण उनका नीतीश को दशरथ बनाना और खुद को राम बताना था. तेजस्वी ने कहा कि नीतीश कुमार को वे दशरथ पिता की तरह गार्जियन मानते हैं. दशरथ कभी नहीं चाहते थे कि राम को वनवास हो. लेकिन, कुछ न कुछ नीतीश की जरूर मजबूरिया रही होंगी, जैसी मजबूरियां राजा दशरथ की थी, जिस वजह से राम को वनवास जाना पड़ा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पिता दशरथ समान हैं नीतीश</strong></p>
<p style="text-align: justify;">तेजस्वी ने कहा कि नीतीश कुमार को जरूर ये जानना होगा कि आखिर कौन केकई है, जिनकी वजह से उन्हें ये फैसला लेने को मजबूर होना पड़ा. उन्होंने कहा कि हम ये मानते हैं कि उनके लिए ये वनवास नहीं बल्कि जनता के सुख-दुख के साथ भागीदार के लिए उन्हें भेजा गया है.&nbsp;</p>
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<p style="text-align: justify;">तेजस्वी यादव लगातार नीतीश कुमार से अपने सौम्य भाषण के दौरान ये बात पूछते रहे- बिहार की जनता ये जानना चाहती है कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि आपको ये निर्णय लेना पड़ा? आप एनडीए छोड़कर इसलिए आए थें क्योंकि आपका ये आरोप था कि जेडीयू के विधायकों को बीजेपी की तरफ से तोड़ा जा रहा हैं, उन्हें प्रलोभन दिया जा रहा है? आपने तो कहा था कि हमलोगों का एक ही लक्ष्य है, न किसी को पीएम बनना और न किसी को सीएम बनना, फिर ऐसा क्या हो गया?<br />वैसा अगर देखा जाए तो तेजस्वी का ये सवाल वाजिब भी है. लेकिन राजनीति में एक पुरानी कहावत है कि न किसी से दोस्ती, न किसी से बैर. नीतीश की साख पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी यादव ने तो यहां तक कर दिया कि अब बिहार का कोई बच्चा यकीन नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि हम लालू के बेटे हैं, इधर-उधर नहीं करते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>नीतीश की गारंटी कौन लेगा?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">तेजस्वी ने सवाल ये भी उठाया कि क्या अब नीतीश नहीं पलटेंगे, ये क्या मोदी गारंटी है? बिहार में हाल में दी गई नौकरियां का सेहरा अपने सिर बांधने की कोशिश करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि जब हमने नौकरी का वादा किया था तो लोग ये पूछ रहे थे कि कहां से इतनी नौकरियां लाएगा. लेकिन, 2 लाख सरकारी नौकरी दी, इसलिए इच्छा शक्ति होनी चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;">तेजस्वी ने कहा कि मोदी के खिलाफ झंडा अब भतीजा उठाएगा. चाचा गए अब बिहार में भतीजा मोदी सरकार को रोकेगा. सवाल उठता है कि तेजस्वी ने कहीं भी नीतीश सरकार के खिलाफ वैसे कड़े शब्दों का पूरे भाषण में जिक्र नहीं किया, जिसकी उम्मीद की जा रही थी. तो क्या उन्होंने कहीं न कहीं वापसी के लिए एक स्पेस छोड़ा है? दूसरा, जिस तरह और शैली से उन्होंने अपने भाषण में हल्का हमला कर अपनी उपलब्धियों का जिक्र किया, ये क्या कुछ इशारा करता है?</p>
<p style="text-align: justify;">दरअसल, हाल में हुए जातिगत जनगणना सर्वे के आंकड़े को अगर देखें तो बिहार की कुल आबादी 13 करोड़ है, इनमें 81.99 फीसदी हिन्दू और 17.70 फीसदी मुस्लिम हैं. आरजेडी का कोर वोटर मुसलमान और यादव रहा है, यानी इसी एमवाई समीकरण पर आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ने करीब 15 वर्षों तक इस सूबे पर राज किया था.</p>
<p style="text-align: justify;">लेकिन, नीतीश ने आरजेडी के कोर वोटर में सेंध लगाते हुए अति पिछड़ा को साधना शुरू किया, वो चाहे मुसलमान हो या फिर ओबीसी. जातिगत गणना में मुस्लिम आबादी को तीन वर्गों में बांटा गया- जिनमें सबसे उच्च तबके से जो आते हैं शेख-सैयद और पठान उनकी आबाद करीब 4.80 फीसदी है. बैकवॉर्ड मुसलमानों की संख्या 2.03 फीसदी है तो वहीं अति पिछडे़ मुसलमानों की संख्या 10.58 फीसदी है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>वोटर को अपने पाले में खींचना चुनौती</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अब तेजस्वी के सामने इस वक्त ये बड़ी चुनौती है कि अन्य पिछड़ा के साथ-साथ मुसलमानों को किस तरह से नीतीश के एनडीए खेमे में जाने के बाद साधा जाए. बिहार की राजनीति की एक हकीकत है कि जिधर दो प्रमुख दल साथ हुए, उनकी सरकार बनी है. वो चाहे बात जेडीयू-आरजेडी की हो या फिर जेडीयू-बीजेपी की.</p>
<p style="text-align: justify;">ऐसे में तेजस्वी को लगातार मोदी सरकार को रोकने और चुनौती देने वाले इस भाषण के पीछे सूबे के मुसलमान वोटरों को अपनी तरफ खींचना बड़ा मकसद है. अगर ये सूर-ते-हाल बनता है कि लोकसभा चुनाव के साथ-साथ बिहार में विधानसभा का चुनाव भी कराया जाए, तो ये इस वक्त विपक्षी महागठबंधन खेमे के लिए बड़ी चुनौती होगी.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि बिहार में अगले साल चुनाव होना है. लेकिन, नीतीश सरकार अगर विधानसभा भंग कर लोकसभा चुनाव से साथ ही विधानसभा चुनाव में भी चली जाती है, तो किसी को इसमें भी हैरानी नहीं होनी चाहिए.</p>
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<p style="text-align: justify;"><strong>[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.]</strong></p>
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